हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.66.30

मंडल 9 → सूक्त 66 → श्लोक 30 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 66
यस्य॑ ते द्यु॒म्नव॒त्पयः॒ पव॑मा॒नाभृ॑तं दि॒वः । तेन॑ नो मृळ जी॒वसे॑ ॥ (३०)
हे पवित्र होते हुए सोम! बाज पक्षी रूपिणी गायत्री द्वारा ्युलोक से लाया गया व अन्नयुक्त दूध तुम्हारा अपना है. हमें उसके द्वारा चिरजीवन पाने के लिए सुखी बनाओ. (३०)
O holy, Mon! The milk brought from Yulok by the hawk bird Rupini Gayatri and the food-containing milk is your own. Make us happy to have eternal life through Him. (30)