ऋग्वेद (मंडल 9)
क॒कु॒हः सो॒म्यो रस॒ इन्दु॒रिन्द्रा॑य पू॒र्व्यः । आ॒युः प॑वत आ॒यवे॑ ॥ (८)
सर्वश्रेष्ठ, पूर्वजों द्वारा निर्मित, इंद्र को प्राप्त होने वाला एवं पात्रों में छनता हुआ सोमरस सर्वत्र गतिशील इंद्र के लिए कलशों में पवित्र होता है. (८)
At best, the somras, created by the ancestors, receiving Indra and filtering in the characters, is sacred in the kalash for the moving Indra everywhere. (8)