ऋग्वेद (मंडल 9)
सिन्धो॑रिव प्रव॒णे नि॒म्न आ॒शवो॒ वृष॑च्युता॒ मदा॑सो गा॒तुमा॑शत । शं नो॑ निवे॒शे द्वि॒पदे॒ चतु॑ष्पदे॒ऽस्मे वाजाः॑ सोम तिष्ठन्तु कृ॒ष्टयः॑ ॥ (७)
जिस प्रकार नदियां सागर में मिलती हैं, उसी प्रकार ऋत्विजों द्वारा निचोड़े गए नशीले सोम इंद्र के पास पहुंचते हैं. हे सोम! हमारे घर में पशुओं एवं परिवारीजनों को सुख दो तथा हमें अन्न और संतान दो. (७)
Just as rivers meet in the sea, so the intoxicating Som, squeezed by the Ritvijas, approaches Indra. Hey Mon! Give happiness to the animals and family members in our house and give us food and children. (7)