ऋग्वेद (मंडल 9)
श्वे॒तं रू॒पं कृ॑णुते॒ यत्सिषा॑सति॒ सोमो॑ मी॒ढ्वाँ असु॑रो वेद॒ भूम॑नः । धि॒या शमी॑ सचते॒ सेम॒भि प्र॒वद्दि॒वस्कव॑न्ध॒मव॑ दर्षदु॒द्रिण॑म् ॥ (७)
पात्र में पहुंचकर सोम पात्र का रूप उज्ज्वल कर देते हैं. अभिलाषापूरक एवं शक्तिशाली सोम स्तोताओं को बहुत धन देना जानते हैं, अपनी बुद्धि की सहायता से उत्तम कर्मो को प्राप्त करते हैं एवं आकाश में घिरे हुए जलपूर्ण मेघ को फाड़ते हैं. (७)
Reaching into the character, Mon brightens up the character's look. The desireful and powerful Som knows to give a lot of money to the stotas, with the help of their intellect, get good deeds and tear apart the watery cloud surrounded in the sky. (7)