हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.75.4

मंडल 9 → सूक्त 75 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 75
अद्रि॑भिः सु॒तो म॒तिभि॒श्चनो॑हितः प्ररो॒चय॒न्रोद॑सी मा॒तरा॒ शुचिः॑ । रोमा॒ण्यव्या॑ स॒मया॒ वि धा॑वति॒ मधो॒र्धारा॒ पिन्व॑माना दि॒वेदि॑वे ॥ (४)
पत्थरों की सहायता से निचोड़े गए, अन्न के लिए हितकारक एवं शुद्ध सोम जगत्‌ का निर्माण करने वाली द्यावा-पृथिवी को प्रकाशित करके भेड़ के बालों से बने दशापवित्र पर जाते हैं एवं जल से मिली हुई मादक सोम की धार प्रतिदिन दशापवित्र पर गिरती है. (४)
Squeezed with the help of stones, beneficial for food and creating pure Soma Jagat, they go to the Dashapavitra made of sheep's hair and the edge of intoxicating Soma mixed with water falls on the Dashapavitra every day. (4)