हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.86.20

मंडल 9 → सूक्त 86 → श्लोक 20 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 86
म॒नी॒षिभिः॑ पवते पू॒र्व्यः क॒विर्नृभि॑र्य॒तः परि॒ कोशा॑ँ अचिक्रदत् । त्रि॒तस्य॒ नाम॑ ज॒नय॒न्मधु॑ क्षर॒दिन्द्र॑स्य वा॒योः स॒ख्याय॒ कर्त॑वे ॥ (२०)
प्राचीन कवि एवं ऋत्विजों द्वारा नियमित सोम कलशीं में जाने के लिए शब्द करते हुए निचुड़ते हैं. सोम इंद्र एवं वायु के साथ मित्रता करने के लिए इंद्र के निमित्त जल उत्पन्न करते हैं एवं मधुर रस टपकाते हैं. (२०)
Regular som by the ancient poets and ritwijas, they speak the words to go to the kalashin. Soma produces water for Indra's sake to befriend Indra and Vayu and drips sweet juices. (20)