हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.88.2

मंडल 9 → सूक्त 88 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 88
स ईं॒ रथो॒ न भु॑रि॒षाळ॑योजि म॒हः पु॒रूणि॑ सा॒तये॒ वसू॑नि । आदीं॒ विश्वा॑ नहु॒ष्या॑णि जा॒ता स्व॑र्षाता॒ वन॑ ऊ॒र्ध्वा न॑वन्त ॥ (२)
लोग बहुत सा धन लाने के लिए रथ के समान भार ढोने वाले महान्‌ सोम को रथ के समान ही जीतते हैं. युद्ध के अभिलाषी मनुष्य महान्‌ धन देने वाले सोम को संग्राम में ले जाते हैं. (२)
People win the Great Mon, who carries the same weight as a chariot, to bring a lot of money, just like a chariot. The man who aspires to war takes the great wealth-giving Mon into the battle. (2)