हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.90.1

मंडल 9 → सूक्त 90 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 90
प्र हि॑न्वा॒नो ज॑नि॒ता रोद॑स्यो॒ रथो॒ न वाजं॑ सनि॒ष्यन्न॑यासीत् । इन्द्रं॒ गच्छ॒न्नायु॑धा सं॒शिशा॑नो॒ विश्वा॒ वसु॒ हस्त॑योरा॒दधा॑नः ॥ (१)
अध्वर्यु आदि के द्वारा प्रेरित व द्यावा-पृथिवी को उत्पन्न करने वाले सोम रथ के समान अन्न प्रदान करते हुए जाते हैं. सोम इंद्र के पास जाकर अपने आयुध तेज करते हैं एवं हमें देने के लिए सभी धन अपने हाथ में धारण करते हैं. (१)
Inspired by Adhwaryu etc., and the one who produces the dyava-prithvivi, they go to provide food like the som rath. Soma goes to Indra and sharpens his arms and holds all the money in his hand to give us. (1)