ऋग्वेद (मंडल 9)
तव॒ त्ये सो॑म पवमान नि॒ण्ये विश्वे॑ दे॒वास्त्रय॑ एकाद॒शासः॑ । दश॑ स्व॒धाभि॒रधि॒ सानो॒ अव्ये॑ मृ॒जन्ति॑ त्वा न॒द्यः॑ स॒प्त य॒ह्वीः ॥ (४)
हे शुद्ध होते हुए सोम! ये तेंतीस देव तुम्हारे हैं एवं स्वर्ग में रहते हैं. दस उंगलियां भेड़ के बालों से बने तथा पर्वत शिखर के समान ऊंचे दशापवित्र में तुम्हें जल के द्वारा शुद्ध करती हैं एवं सात महान् नदियां तुम्हें पवित्र बनाती हैं. (४)
O you are pure, Mon! These thirty-three gods are yours and live in heaven. Ten fingers, made of sheep's hair and as high as a mountain peak, purify you with water and the seven great rivers sanctify you. (4)