हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.93.4

मंडल 9 → सूक्त 93 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 93
स नो॑ दे॒वेभिः॑ पवमान र॒देन्दो॑ र॒यिम॒श्विनं॑ वावशा॒नः । र॒थि॒रा॒यता॑मुश॒ती पुरं॑धिरस्म॒द्र्य१॒॑गा दा॒वने॒ वसू॑नाम् ॥ (४)
हे शुद्ध होते हुए सोम! तुम देवों के साथ मिलकर हमें धन दो. हे सोम! तुम देवों की अभिलाषा करते हुए हमें अश्व वाला धन दो. हम रथस्वामी लोगों की अभिलाषा करने वाली सोम की बुद्धि अनेक प्रकार का धन देने के लिए हमारे सामने आवे. (४)
O you are pure, Mon! You together with the gods give us wealth. Hey Mon! You wish the gods and give us the riches of the horse. Let us come before us to give many kinds of wealth to the wisdom of Som, who wishes for the chariot-bearers. (4)