ऋग्वेद (मंडल 9)
स्वा॒यु॒धः सो॒तृभिः॑ पू॒यमा॑नो॒ऽभ्य॑र्ष॒ गुह्यं॒ चारु॒ नाम॑ । अ॒भि वाजं॒ सप्ति॑रिव श्रव॒स्याभि वा॒युम॒भि गा दे॑व सोम ॥ (१६)
हे शोभन आयुध वाले एवं ऋत्विजो द्वारा शुद्ध किए जाते हुए सोम! तुम अपने छिपे हुए एवं सुंदर रसात्मक रूप को धारण करो. हमें जब अन्न की अभिलाषा हो, तब तुम हमें अन्न दो. हे सोमदेव! तुम हमें जीवन एवं गाएं दो. (१६)
O Shobhan Warriors and being purified by Ritvizo Mon! You wear your hidden and beautiful juicy form. When we desire food, give us food. O Somdev! You give us life and sing. (16)