हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.98.4

मंडल 9 → सूक्त 98 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 98
स हि त्वं दे॑व॒ शश्व॑ते॒ वसु॒ मर्ता॑य दा॒शुषे॑ । इन्दो॑ सह॒स्रिणं॑ र॒यिं श॒तात्मा॑नं विवाससि ॥ (४)
हे सोम! तुम बहुत से मनुष्यों और मुझ यजमान को दान देते हो. हे दीप्तिशाली सोम! तुम सैकड़ों और हजारों प्रकार का धन देते हो. (४)
Hey Mon! You give many human beings and to my host. O radiant Mon! You give hundreds and thousands of kinds of money. (4)