हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 9.98.6

मंडल 9 → सूक्त 98 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 9)

ऋग्वेद: | सूक्त: 98
द्विर्यं पञ्च॒ स्वय॑शसं॒ स्वसा॑रो॒ अद्रि॑संहतम् । प्रि॒यमिन्द्र॑स्य॒ काम्यं॑ प्रस्ना॒पय॑न्त्यू॒र्मिण॑म् ॥ (६)
काम करने के लिए इधर-उधर जाने वाली दस उंगलियों द्वारा पत्थरों की सहायता से निचोड़े गए, इंद्र के प्रिय, सबके द्वारा अभिलषित एवं लहरों वाले सोम को जल में स्नान कराती हैं. (६)
Squeezed with the help of stones by ten fingers going around to work, Indra's beloved, admired by everyone and the wavy Som bathes in the water. (6)