हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 1.2.9

अध्याय 1 → खंड 2 → मंत्र 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 1)

सामवेद: | खंड: 2
अग्निमिन्धानो मनसा धियँ सचेत मर्त्यः । अग्निमिन्धे विवस्वभिः ॥ (९)
हे अग्नि! मनुष्य मन लगा कर आप को तथा अपनी श्रद्धा को जगाता है. सूर्य की किरणों के साथ आप को प्रकाशित करता है. (९)
O agni! Man awakens himself and his faith by putting his mind. Illuminates you with the rays of the sun. (9)