हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 1.3.14

अध्याय 1 → खंड 3 → मंत्र 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 1)

सामवेद: | खंड: 3
कस्य नूनं परीणसि धियो जिन्वसि सत्पते । जोषाता यस्य ते गिरः ॥ (१४)
हे अग्नि! आप सत्य (सज्जन) के पालनहार हैं. आप इस समय किस तरह के मानव के कर्मो को सत्य मार्ग (ब्रज) तक पहुंचा रहे हैं. किस कर्म से आप की कृपा गौओं को प्राप्त कराने वाली होगी. (१४)
O agni! You are the sustainer of truth (gentleman). What kind of human deeds are you taking to the path of truth (Braj) at this time? By what karma will your grace be going to get the cows? (14)