हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 1.3.4

अध्याय 1 → खंड 3 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 1)

सामवेद: | खंड: 3
अग्ने रक्षा णो अँहसः प्रति स्म देव रीषतः । तपिष्ठैरजरो दह ॥ (४)
हे अग्नि! आप पापों से हमारी रक्षा कीजिए. आप दिव्य तेज वाले हैं. आप अजर (बुढ़ापे से रहित) हैं. आप हमारा नुकसान करने की इच्छा रखने वाले शत्रुओं को अपने तेजताप से भस्म कर दीजिए. (४)
O agni! Protect us from sins. You are the one of divine glory. You are ajar (devoid of old age). You consume the enemies who want to harm us with your sharpness. (4)