हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 1.3.6

अध्याय 1 → खंड 3 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 1)

सामवेद: | खंड: 3
नि त्वा नक्ष्य विश्पते द्युमन्तं धीमहे वयम् । सुवीरमग्न आहुत ॥ (६)
हे अग्नि! हम आप की शरण में हैं. यजमान आप को आमंत्रित करते हैं. आप की पूजा करते हैं. आप की पूजा से सब प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं. हम ने हृदय से आप को यहां स्थापित किया है. (६)
O agni! We are in your shelter. Host invite you. Worship you. All kinds of happiness are obtained by worshiping you. We have established you here from the heart. (6)