हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 1.8.3

अध्याय 1 → खंड 8 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 1)

सामवेद: | खंड: 8
शुक्रं ते अन्यद्यजतं ते अन्यद्विषुरूपे अहनी द्यौरिवासि । विश्वा हि माया अवसि स्वधावन्भद्रा ते पूषन्निह रातिरस्तु ॥ (३)
हे पूषा! आप का तेजस्वी रंग वाला दिन अलग है. उसी तरह काले रंग वाली रात्रि अलग है. आप की महिमा से ये अलगअलग रंग वाले भाग एक ही दिनरात के हैं. आप पोषण करने वाले हैं. आप सारे जग की रक्षा करने वाले हैं. आप कल्याण करने वाले हैं. आप हमारा कल्याण करें. (३)
O Pusha! Your bright colored day is different. In the same way, the night with black color is different. These different colored parts from your glory are of the same day and night. You are the nurturer. You are going to protect the whole world. You are a welfare doer. You do us welfare. (3)