हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 1.8.6

अध्याय 1 → खंड 8 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 1)

सामवेद: | खंड: 8
प्र सम्राजमसुरस्य प्रश्स्तं पुँसः कृष्टीनामनुमाद्यस्य । इन्द्रस्येव प्र तवसस्कृतानि वन्दद्वारा वन्दमाना विवष्टु ॥ (६)
हे अग्नि! आप बलवान और वीर मनुष्य के स्तुति योग्य हैं. आप बल में इंद्र के समान हैं. आप के इस प्रशंसनीय स्वरूप की स्तुति करते हैं. हे यजमान! स्तुति और आराधना से अग्नि की उपासना करो. (६)
O agni! You are worthy of praise for a strong and brave man. You are like Indra in force. Praise this admirable form of you. O host! Worship agni with praise and worship. (6)