हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 11.1.12

अध्याय 11 → खंड 1 → मंत्र 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 11)

सामवेद: | खंड: 1
परि नः शर्मयन्त्या धारया सोम विश्वतः । सरा रसेव विष्टपम् ॥ (१२)
हे सोम! आप उसी तरह अपनी धाराएं हमारे चारों ओर फैला दीजिए, जिस तरह भूलोक के चारों ओर सुखद जल की धाराएं फैली हुई हैं. (१२)
O Mon! You spread your streams around us in the same way as streams of pleasant water are spread around the earth. (12)