सामवेद (अध्याय 11)
विश्वाः पृतना अभिभूतरं नरः सजूस्ततक्षुरिन्द्रं जजनुश्च राजसे । क्रत्वे वरे स्थेमन्यामुरीमुतोग्रमोजिष्ठं तरसं तरस्विनम् ॥ (४)
हे इंद्र! सभी आप का महत्त्व स्वीकारते हैं. सब आप की उपासना करते हैं. आप ने अपने बल से दुश्मनों का नाश किया. आप ने अपने श्रेष्ठ कर्मो से उच्चा पदवी पाई. आप की महिमा गाने वाले की सामर्थ्य शक्ति बढ़ती है. आप बहुत जल्दी कार्य करते हैं. आप जल्दी हमारी इच्छा पूरी करिए. (४)
O Indra! Everyone accepts the importance of you. Everyone worships you. You destroyed the enemies with your force. You got a high status by your best deeds. The power power of the person who sings your glory increases. You act very quickly. You fulfill our wish quickly. (4)