हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 11.5.8

अध्याय 11 → खंड 5 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 11)

सामवेद: | खंड: 5
इन्द्रं तँ शुम्भ्य पुरुहन्मन्नवसे यस्य द्विता विधर्त्तरि । हस्तेन वज्रः प्रति धायि दर्शतो महां देवो न सूर्यः ॥ (८)
हे यजमानो! इंद्र वञ्रधारी, देखने में सुंदर व सूर्य जैसे तेजस्वी हैं. उन में द्विधा (दोहरी) शक्ति है. वे देवों की रक्षा, राक्षसों का नाश व हमें संरक्षण प्रदान करते हैं. हम सभी को उन की उपासना करनी चाहिए. (८)
O hosts! Indra is beautiful to look at and bright like the sun. They have double power. They protect the gods, destroy the demons and protect us. We should all worship him. (8)