सामवेद (अध्याय 12)
प्र कविर्देववीतयेऽव्या वारेभिरव्यत । साह्वान्विश्वा अभि स्पृधः ॥ (१)
हे सोम! आप कवि हैं. आप को देवताओं के लिए परिष्कृत किया जाता है. आप सभी शत्रुओं से स्पर्धा करने वाले हैं. (१)
O Mon! You are a poet. You are refined to the gods. You are going to compete with all enemies. (1)