सामवेद (अध्याय 12)
स वह्निरप्सु दुष्टरो मृज्यमानो गभस्त्योः । सोमश्चमूषु सीदति ॥ (६)
हे सोम! आप जलमय व तेजस्वी हैं. आप परिष्कृत किए जाते हुए द्रोणकलश में जा कर बैठ जाते हैं. (६)
O Mon! You are charming and stunning. You go and sit in dronakalash while being refined. (6)