हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 12.2.9

अध्याय 12 → खंड 2 → मंत्र 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 12)

सामवेद: | खंड: 2
इन्दो यथा तव स्तवो यथा ते जातमन्धसः । नि बर्हिषि प्रिये सदः ॥ (९)
हे सोम! यजमान जिस भावना से आप की स्तुति करते हैं, आप भी उसी प्रिय भावना से यज्ञ में कुश के आसन पर विराजने की कृपा कीजिए. (९)
O Mon! The spirit with which the host praises you, please sit on the seat of Kush in the yagna with the same dear feeling. (9)