हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 12.3.5

अध्याय 12 → खंड 3 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 12)

सामवेद: | खंड: 3
ता वाँ सम्यगद्रुह्वाणेषमश्याम धाम च । वयं वां मित्रा स्याम ॥ (५)
हे सूर्य! हे वरुण! आप दोनों देव अद्वेषी हैं. हम आप की सम्यकू रूप से उपासना करते हैं. हम आप दोनों के मित्र हो जाएं. (५)
O sun! O Varuna! Both of you are dev atheists. We worship you properly. Let us be friends of both of you. (5)