हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 12.7.7

अध्याय 12 → खंड 7 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 12)

सामवेद: | खंड: 7
असावि सोम इन्द्र ते शविष्ठ धृष्णवा गहि । आ त्वा पृणक्त्विन्द्रियँ रजः सूर्यो न रश्मिभिः ॥ (७)
हे इंद्र! आप शत्रुओं को हराते हैं. आप सामर्थ्यवान हैं. आप पधारने की कृपा कीजिए. आप के लिए सोमरस भेंट किया गया है. आप हमारे यज्ञ को पधार कर उसी प्रकार प्रकाशित कीजिए, जिस प्रकार सूर्य अपनी किरणों से अंतरिक्षलोक को प्रकाशित करते हैं. (७)
O Indra! You defeat enemies. You are powerful. Please come. Somers has been gifted to you. You come and illuminate our yajna in the same way as the sun illuminates the space world with its rays. (7)