हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 13.1.15

अध्याय 13 → खंड 1 → मंत्र 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 13)

सामवेद: | खंड: 1
गोषा इन्दो नृषा अस्यश्वसा वाजसा उत । आत्मा यज्ञस्य पूर्व्यः ॥ (१५)
हे सोम! आप यज्ञ के मुख्याधार व यज्ञ की आत्मा हैं. आप गोधन, अश्वधन और संतानधन के दाता हैं. (१५)
O Mon! You are the main base of yajna and the soul of yajna. You are the giver of Godhan, Ashwadhan and Santandhandhan. (15)