हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 13.3.3

अध्याय 13 → खंड 3 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 13)

सामवेद: | खंड: 3
शकेम त्वा समिधँ साधया धियस्त्वे देवा हविरदन्त्याहुतम् । त्वमादित्याँ आ वह तान्ह्यू३श्मस्यग्ने सख्ये मा रिषामा वयं तव ॥ (३)
हे अग्नि! हम समिधाओं से आप को प्रज्वलित करते हैं. हम देवताओं को हवि प्रदान करते हैं. आप उस हवि को ग्रहण करने के लिए देवताओं को बुलाने की कृपा कीजिए. हम उन्हें आमंत्रित करने के इच्छुक हैं. आप अपनी मित्रता से हमारे सारे कष्टों को दूर करने की कृपा कीजिए. (३)
O agni! We ignite you with samidhas. We give havi to the gods. Please call the gods to receive that havi. We are keen to invite them. Please remove all our sufferings with your friendship. (3)