सामवेद (अध्याय 13)
एतमु त्यं दश क्षिपो मृजन्ति सिन्धुमातरम् । समादित्येभिरख्यत ॥ (६)
हे सोम! समुद्र आप की माता है. दसों अंगुलियों से परिष्कृत किया हुआ सोमरस देवताओं को चढ़ाया जाता है. (६)
O Mon! The sea is your mother. Someras, refined with ten fingers, is offered to the gods. (6)