हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 13.6.10

अध्याय 13 → खंड 6 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 13)

सामवेद: | खंड: 6
ते पूतासो विपश्चितः सोमासो दध्याशिरः । सूरासो न दर्शतासो जिगत्नवो ध्रुवा घृते ॥ (१०)
हे सोम! आप पवित्र हैं, सूर्य जैसे प्रकाशमान हैं. आप विलक्षण व दही मिश्रित हैं. आप ध्रुव (स्थिर) हैं. आप जल धारा से मिश्रित हो कर शुद्ध होते हैं. (१०)
O Mon! You are holy, shining like the sun. You are fantastic and yogurt mixed. You are pole (stationary). You are purified by mixing with the water stream. (10)