हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 14.1.3

अध्याय 14 → खंड 1 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 14)

सामवेद: | खंड: 1
स योजत उरुगायस्य जूतिं वृथा क्रीडन्तं मिमते न गावः । परीणसं कृणुते तिग्मश‍ृङ्गो दिवा हरिर्ददृशे नक्तमृज्रः ॥ (३)
हे सोम! सहज रूप से खेलते हुए आप प्रशंसित गति पाते हैं, उस गति को किसी के द्वारा नापा नहीं जा सकता. आप दिन में हरी और रात्रि में सफेद (उज्ज्वल) आभा वाले होते हैं. (३)
O Mon! Playing instinctively, you get the acclaimed speed, that speed cannot be measured by anyone. You are green during the day and white (bright) aura at night. (3)