सामवेद (अध्याय 14)
आ मन्द्रमा वरेण्यमा विप्रमा मनीषिणम् । पान्तमा पुरुस्पृहम् ॥ (११)
हे सोम! आप को बहुत लोग चाहते हैं. आप वरेण्य, ब्राह्मण, मनीषी व संरक्षणशील हैं. हम आप की उपासना करते हैं. (११)
O Mon! Many people want you. You are a varenya, Brahmin, mystic and protector. We worship you. (11)