हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 14.2.4

अध्याय 14 → खंड 2 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 14)

सामवेद: | खंड: 2
परि यत्काव्या कविर्नृम्णा पुनानो अर्षति । स्वर्वाजी सिषासति ॥ (४)
सोम कवि हैं. कवि सोम जैसे ही मनुष्य की स्तुति स्वीकारते हैं, वैसे ही इंद्र यज्ञ स्थान पर अपनी शक्ति सहित आने के लिए तैयार हो जाते है. (४)
Som is a poet. As soon as poet Som accepts the praise of man, Indra is ready to come to the yagna place with his power. (4)