हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 14.3.4

अध्याय 14 → खंड 3 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 14)

सामवेद: | खंड: 3
प्र वो मित्राय गायत वरुणाय विपा गिरा । महिक्षत्रावृतं बृहत् ॥ (४)
हे यजमानो! मित्र और वरुण महान, क्षात्रवान व विशाल हैं. आप इन देवों के लिए ऊंचे स्वर से स्तोत्र गाइए. दोनों देव उन स्तोत्रों को सुनने के लिए यज्ञ स्थान पर पधारने की कृपा करें. (४)
O hosts! Friends and Varuna are great, brilliant and huge. You sing hymns with a loud voice for these gods. Both the gods should be pleased to come to the yajna place to listen to those stotras. (4)