हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 15.3.5

अध्याय 15 → खंड 3 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 15)

सामवेद: | खंड: 3
यः सोमः कलशेष्वा अन्तः पवित्र आहितः । तमिन्दुः परि षस्वजे ॥ (५)
सोमरस पवित्र है. जो सोमरस कलश में रखा हुआ है, उस में चंद्रमा के श्रेष्ठ गुणों का वास है. (५)
Somerus is holy. The someras which is kept in the kalash resides in the best qualities of the moon. (5)