हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 15.6.1

अध्याय 15 → खंड 6 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 15)

सामवेद: | खंड: 6
अग्निं वो देवमग्निभिः सजोषा यजिष्ठं दूतमध्वरे कृणुध्वम् । यो मर्त्येषु निध्रुविरृतावा तपुर्मूर्धा घृतान्नः पावकः ॥ (१)
हे देवगण! अग्नि सर्वत्र पूज्य हैं. आप यज्ञ में उन को दूत बना कर भेजने की कृपा कीजिए. वे मनुष्यों के मित्र और पवित्र हैं. घृत (घी) उन का अन्न है. वे तेजस्वी हैं. (१)
O Gods! Agni is revered everywhere. Please send them as messengers in the yajna. They are friends and holy to human beings. Ghee (ghee) is their food. They are stunning. (1)