हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 15.6.4

अध्याय 15 → खंड 6 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 15)

सामवेद: | खंड: 6
तमिन्द्रं वाजयामसि महे वृत्राय हन्तवे । स वृषा वृषभो भुवत् ॥ (४)
इंद्र शक्तिमान हैं. वे और अधिक शक्तिशाली होने की कृपा करें. हम दुश्मनों के नाश के लिए इंद्र को और ज्यादा बलवान बनाना चाहते हैं. (४)
Indra is powerful. Please be they more powerful. We want to make Indra stronger to destroy enemies. (4)