हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 15.7.1

अध्याय 15 → खंड 7 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 15)

सामवेद: | खंड: 7
अध्वर्यो अद्रिभिः सुतँ सोमं पवित्र आ नय । पुनाहीन्द्राय पातवे ॥ (१)
हे पुरोहितो! सोमरस पवित्र है. पाषाणों से कूट कर इस का रस निकाला गया है. उस को छन्ने में छान कर परिष्कृत किया गया है ताकि इंद्र उसे पी सकें. (१)
O priests! Somerus is holy. Its juice has been extracted by crushing it with stones. It has been filtered and refined in the filter so that Indra can drink it. (1)