सामवेद (अध्याय 15)
धर्त्ता दिवः पवते कृत्व्यो रसो दक्षो देवानामनुमाद्यो नृभिः । हरिः सृजानो अत्यो न सत्वभिर्वृथा पाजाँसि कृणुषे नदीष्वा ॥ (४)
सोमरस मधुर और देवताओं का बल बढ़ाने वाला है, यजमान इस की प्रशंसा करते हैं. अंतरिक्ष में शुद्ध होता हुआ यह हरा सोमरस वेगवान घोड़ों की तरह धारा के रूप में अपनी सामर्थ्य प्रकट करता है. (४)
Someras is sweet and increases the strength of the gods, the host praises it. Purifying in space, this green somerus shows its strength in the form of a stream like fast horses. (4)