हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 16.1.10

अध्याय 16 → खंड 1 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 16)

सामवेद: | खंड: 1
एष दिवं वि धावति तिरो रजाँसि धारया । पवमानः कनिक्रदत् ॥ (१०)
सोम पवित्र हैं. वे छन कर धारा का रूप धर कर आवाज करते हुए शत्रुलोक को जीतते हैं. वे यज्ञ के प्रभाव से स्वर्गलोक की ओर दौड़ते हैं. (१०)
Som is holy. They filter and take the form of a stream and win the enemy land by making a sound. They run towards heaven with the effect of yajna. (10)