सामवेद (अध्याय 16)
प्र ते सोतारो रसं मदाय पुनन्ति सोमं महे द्युम्नाय ॥ (११)
हे सोम! पृथ्वी पर यजमान आनंद पाने के लिए आप के रस को साफ कर के छानते हैं. (११)
O Mon! To get the host pleasure on earth, clean and filter your juice. (11)
अध्याय 16 → खंड 11 → मंत्र 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation