हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 16.12.9

अध्याय 16 → खंड 12 → मंत्र 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 16)

सामवेद: | खंड: 12
युङ्क्ष्वा हि केशिना हरी वृषणा कक्ष्यप्रा । अथा न इन्द्र सोमपा गिरामुपश्रुतिं चर ॥ (९)
हे इंद्र! आप सोमरस पीने वाले हैं. आप के घोड़े गरदन पर अच्छे बाल वाले व मजबूत अंगों वाले हैं. आप उन घोड़ों को रथ में जोतिए और हमारी स्तुति सुनने के लिए यज्ञ में पधारिए. (९)
O Indra! You're a somers drinker. Your horses have good hair and strong limbs on the neck. You plough those horses in the chariot and come to the yagna to hear our praise. (9)