सामवेद (अध्याय 16)
एष हितो वि नीयतेऽन्तः शुन्ध्यावता पथा । यदी तुञ्जन्ति भूर्णयः ॥ (४)
सोम को यज्ञ स्थान पर ले जाया जाता है. वहां पर पुरोहित उसे शुद्ध करते हैं, पवित्र बनाते हैं, तब देवताओं के हवि के रूप में इस का प्रयोग किया जाता है. (४)
Som is taken to the yajna place. There the priests purify it, make it holy, then it is used as the havi of the gods. (4)