हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 16.5.2

अध्याय 16 → खंड 5 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 16)

सामवेद: | खंड: 5
एष इन्द्राय वायवे स्वर्जित्परि षिच्यते । पवित्रे दक्षसाधनः ॥ (२)
सोम इंद्र और वायु के लिए छन कर नीचे भूलोक पर पधारते हैं. वे पवित्र और स्वर्गिक सुखदाता हैं. (२)
Som filters for Indra and Vayu and comes down to the earth. They are holy and heavenly comforters. (2)