हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 16.6.5

अध्याय 16 → खंड 6 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 16)

सामवेद: | खंड: 6
स वृत्रहा वृषा सुतो वरिवोविददाभ्यः । सोमो वाजमिवासरत् ॥ (५)
सोम शत्रुनाशक, शक्तिवर्धक व धनदाता हैं. निचोड़ कर निकाले जाते समय ये घोड़े के समान वेगवान हो कर घड़े में प्रवेश करते हैं. (५)
Som is an enemy destroyer, powerful and a wealth giver. While being squeezed and removed, they enter the pitcher as fast as a horse. (5)