सामवेद (अध्याय 16)
यः पावमानीरध्येत्यृषिभिः सम्भृतँ रसम् । सर्वँ स पूतमश्नाति स्वदितं मातरिश्वना ॥ (१)
जो यजमान ऋषियों द्वारा संकलित जीवन की उपयोगी बातों में ध्यान लगाता है, पवित्रकारी सूक्तों (मंत्रों, स्तुतियों) का पाठ करता है वह यजमान पवित्र और पोषक अन्नादि रसों का आनंद लेता है. (१)
The host who meditates on the useful things of life compiled by the sages, recites the holy suktas (mantras, praises), the host enjoys the holy and nutritious anadi rasas. (1)