हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 17.3.6

अध्याय 17 → खंड 3 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 17)

सामवेद: | खंड: 3
प्रेद्धो अग्ने दीदिहि पुरो नोऽजस्रया सूर्म्या यविष्ठ । त्वाँ शश्वन्त उप यन्ति वाजाः ॥ (६)
हे अग्नि! आप शाश्वत, शक्तिशाली और अजस्र हैं. आप भलीभांति प्रज्वलित होइए. आप ज्वालाओं से प्रज्वलित होने की कृपा कीजिए. हम आप को जौ मिश्रित हवि भेंट करते हैं. (६)
O agni! You are eternal, powerful and unbreakable. You ignite well. Please ignite with flames. We offer you barley mixed havi. (6)