हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 17.3.8

अध्याय 17 → खंड 3 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 17)

सामवेद: | खंड: 3
अन्तश्चरति रोचनास्य प्राणादपानती । व्यख्यन्महिषो दिवम् ॥ (८)
हे सूर्य! आप स्वर्गलोक को प्रकाश और तेज से भर देते हैं. आप का तेज आकाश और पृथ्वी के बीच चमकता रहता है. (८)
O sun! You fill heaven with light and brightness. Your brightness shines between the sky and the earth. (8)