हरि ॐ

सामवेद (Samved)

सामवेद 18.1.4

अध्याय 18 → खंड 1 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

सामवेद (अध्याय 18)

सामवेद: | खंड: 1
उत ब्रुवन्तु जन्तव उदग्निर्वृत्रहाजनि । धनञ्जयो रणेरणे ॥ (४)
अन्ने युद्धों में दुश्मनों को हराते हैं व उन का धन जीतते हैं. वे प्रकट हो गए हैं. मंत्र गायक पुरोहित को उन की स्तुति करनी चाहिए. (४)
In their wars, they defeat the enemies and win their wealth. They have appeared. The mantra singer purohit should praise them. (4)